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पुलिस महानिदेशक उ०प्र० से पुलिस मुख्यालय में भ्रमण पर आए 12 प्रशिक्षु पुलिस उपाधीक्षकों द्वारा मुलाकात की गई पु

लखनऊ/ उत्तर प्रदेश

पुलिस महानिदेशक उ०प्र० से पुलिस मुख्यालय में भ्रमण पर आए 12 प्रशिक्षु पुलिस उपाधीक्षकों द्वारा मुलाकात की गई

पुलिस महानिदेशक उ0प्र0 द्वारा प्रशिक्षु पुलिस उपाधीक्षकों को विश्व के सबसे बड़े पुलिस बल से जुड़ने की बधाई दी गई

उ0प्र0 पुलिस सेवा मे चयनित होना केवल उपलब्धि नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और उत्तरदायित्व की बड़ी जिम्मेदारी है।

वर्तमान समय में प्रोफेशनल नॉलेज—विशेषकर विधि, साइबर अपराध, डिजिटल एवं फॉरेंसिक साक्ष्य—का गहन ज्ञान अत्यंत आवश्यक है।

प्रशिक्षण काल सेवा जीवन की नींव है; कठिन परिस्थितियों में त्वरित एवं सही निर्णय के लिए आत्मविश्वास और ज्ञान ही सबसे बड़ा सहारा है।

पुलिसिंग केवल नौकरी नहीं, बल्कि “Way of Life” है—इसमें उच्च आचरण, जवाबदेही और प्रोफेशनलिज़्म अनिवार्य हैं।

प्रत्येक पीड़ित के प्रति सहानुभूति (Empathy), विनम्रता, निष्पक्षता और प्रभावी समस्या समाधान ही एक सफल एवं संवेदनशील अधिकारी की पहचान है।

आज दिनांक 11.02.2026 को पुलिस महानिदेशक उ०प्र० श्री राजीव कृष्ण द्वारा पुलिस मुख्यालय में, आधारभूत प्रशिक्षण के क्रम में भ्रमण पर आये, प्रान्तीय पुलिस सेवा के 92वें बैच के 12 पुलिस उपाधीक्षकों से भेंट वार्ता की गयी। उक्त 12 प्रशिक्षुओं में से 06 महिला एवं 06 पुरुष है । शैक्षिक पृष्ठभूमि के अनुसार इनमे से 06 परास्नातक (02 एम०एस०सी० एवं 04 एम०ए० डिग्री धारक) हैं तथा 06 स्नातक (01 बी०टेक०, 03 बी०एस०सी०, 01 एल०एल०बी० व 01 बी0ए0) की डिग्री धारक हैं।

पुलिस महानिदेशक, उ0प्र0 श्री राजीव कृष्ण* ने प्रशिक्षु पुलिस उपाधीक्षकों को संबोधित करते हुए सर्वप्रथम सभी प्रशिक्षुओं को विश्व के सबसे बड़े पुलिसबल के सदस्य बनने पर हार्दिक बधाई दी। उन्होंने इसे न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि, बल्कि अत्यंत गर्व का विषय बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस का हिस्सा बनना सेवा, समर्पण और उत्तरदायित्व की एक बड़ी जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा में आने से पहले प्रत्येक व्यक्ति के मन में अपने अनुभवों, परिजनों, सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों के आधार पर पुलिस के प्रति एक धारणा बनी होती है—प्रशिक्षण के बाद जब वे स्वयं पुलिस का हिस्सा बनकर जनता से संवाद करते हैं, तब उन्हें परिस्थितियों को एक नए दृष्टिकोण से देखने और सही-गलत का वास्तविक आकलन करने का अवसर मिलता है।

पुलिस महानिदेशक ने स्पष्ट किया कि पुलिसिंग अत्यंत चुनौतीपूर्ण एवं कठिन दायित्व है। समाज की पुलिस से अपेक्षाएँ निरंतर बढ़ रही हैं और समय के साथ पुलिसिंग का स्वरूप तथा चुनौतियों का प्रकार भी बदलता गया है। अपने 32 वर्षों के अनुभव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज की चुनौतियाँ पूर्व की अपेक्षा अधिक जटिल और बहुआयामी हैं।

उन्होंने बल देते हुए कहा कि वर्तमान समय में प्रोफेशनल नॉलेज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। अधिकारियों को विधि, विभिन्न अधिनियमों एवं नियमों की गहन जानकारी के साथ-साथ साइबर अपराध, साइबर अन्वेषण, सूचना प्रौद्योगिकी, डिजिटल साक्ष्य, फॉरेंसिक साक्ष्य तथा पारंपरिक साक्ष्य संकलन की विधियों का समुचित ज्ञान होना आवश्यक है। विभाग एवं जनता दोनों की अपेक्षाएँ इन विषयों पर पिछले 10-20 वर्षों की तुलना में कहीं अधिक बढ़ चुकी हैं।

उन्होंने कहा कि अकादमी में व्यतीत किया जाने वाला समय अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही वह नींव है जिस पर सम्पूर्ण सेवा जीवन आधारित होगा। पुलिस सेवा में दैनिक स्तर पर ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न होती हैं, जहाँ तत्काल निर्णय लेने होते हैं। अन्य कार्यालयों की भाँति यहाँ हर बार नियम देखने या परामर्श लेने का अवसर नहीं मिलता। विशेषकर भीड़ अथवा आकस्मिक स्थिति में अधिकारी का स्वयं का ज्ञान ही उसका सबसे बड़ा सहारा होता है।

इसी कारण पुलिस प्रशिक्षण अन्य सेवाओं की तुलना में अधिक व्यापक, दीर्घ एवं कठोर होता है। इसमें अकादमिक प्रशिक्षण, शारीरिक प्रशिक्षण, भावनात्मक सुदृढ़ता, तकनीकी दक्षता तथा कौशल-आधारित प्रशिक्षण का समन्वय होता है। प्रशिक्षण के दौरान सभी को अपने सर्वांगीण विकास पर ध्यान देना चाहिए ।

पुलिस महानिदेशक ने कहा कि पुलिस सेवा में हौसला अत्यंत आवश्यक गुण है। कई बार ऐसे निर्णय लेने पड़ते हैं जिनमें आत्मविश्वास एवं साहस की आवश्यकता होती है। यह हौसला प्रशिक्षण, अभ्यास, कौशल विकास और सकारात्मक सोच से विकसित किया जा सकता है। उन्होंने प्रशिक्षुओं को स्मरण कराया कि उनके प्रशिक्षण के अभी नौ माह शेष हैं, जो उनके विधिक ज्ञान, कौशल, जन-संपर्क क्षमता और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि पुलिसिंग केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका (Way of Life) है। इसके साथ ही पुलिस वर्दीधारी एवं अत्यंत दृश्य (visible) सेवा है, अतः इसकी जवाबदेही भी अधिक है। सार्वजनिक एवं व्यक्तिगत जीवन में उच्च प्रतिमान स्थापित करने होते है क्योंकि किसी भी स्तर पर की गई त्रुटि तुरंत सार्वजनिक दृष्टि में आ जाती है।

उन्होंने कहा कि किसी भी अधिकारी का करियर उसके आत्मविश्वास, प्रोफेशनलिज्म और कार्य के परिणामों पर निर्भर करता है। पुलिस विभाग अत्यंत रोचक, चुनौतीपूर्ण और संतोष प्रदान करने वाला क्षेत्र है, और इसकी सफलता का मूल आधार सुदृढ़ एवं गंभीर प्रशिक्षण है। उन्होंने प्रशिक्षुओं को प्रेरित किया कि वे अपने प्रशिक्षण काल का अधिकतम सदुपयोग करें, क्योंकि यही उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव है।

अपने संबोधन में उन्होंने पीड़ित के प्रति गहरी सहानुभूति को सफलता की पहली सीढ़ी बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि अधिकारी प्रत्येक पीड़ित के प्रति ‘एम्पैथी’ की भावना रखेगा, तो वह अपने कर्तव्य पथ पर निरंतर प्रगति करता रहेगा और जनता का विश्वास अर्जित करेगा।

पुलिस महानिदेशक ने पुलिसिंग के मूल मंत्र को स्पष्ट करते हुए कहा कि सेवा में आने से पूर्व एक आम नागरिक के रूप में पुलिस से आपकी जो भी अपेक्षाएं थीं, अब एक पुलिस अधिकारी के रूप में उन्हें स्वयं पूरा करने का प्रयास करें। यही सोच आपको एक संवेदनशील और प्रभावी अधिकारी बनाएगी।

उन्होंने प्रशिक्षुओं को प्रेरित किया कि वे विनम्रता, त्वरित सुनवाई, निष्पक्षता एवं प्रभावी समस्या समाधान जैसे सभी मानकों को अपने आचरण में आत्मसात करें—वे सभी गुण, जिनकी अपेक्षा वे स्वयं एक नागरिक के रूप में पुलिस से करते थे।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशिक्षु अधिकारी इन मूल्यों को अपनाकर उत्तर प्रदेश पुलिस की गौरवशाली परंपरा को और अधिक सुदृढ़ करेंगे।

 भेंट वार्ता के अंत में पुलिस महानिदेशक, उ०प्र० द्वारा सभी प्रशिक्षु पुलिस उपाधीक्षकों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की गयी । तत्पश्चात पुलिस अकादमी की ओर से प्रशिक्षु पुलिस उपाधीक्षक द्वारा पुलिस महानिदेशक महोदय को स्मृति चिन्ह भेंट किया गया।

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